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छत्रपति शिवाजी महाराज: वो योद्धा जिसने औरंगजेब के मामा के घर में घुसकर दी थी चुनौती, जानें कैसे दुश्मनों की नींद उड़ाई

Written By: Rituraj Tripathi @riturajfbd Published : Feb 19, 2026 06:15 am IST, Updated : Feb 19, 2026 06:15 am IST

मराठा साम्राज्य के पहले छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के मौके पर उनकी वीरता को याद किया जा रहा है। उन्होंने मुगल बादशाह औरंगजेब को कड़ी टक्कर दी थी और उसे मजबूर कर दिया था कि वह 25 सालों तक दक्षिण में ही रहे।

Chhatrapati Shivaji Maharaj - India TV Hindi
Image Source : AMIT SHAH/X छत्रपति शिवाजी महाराज

नई दिल्ली: मराठा साम्राज्य के पहले छत्रपति और संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज की आज (19 फरवरी) जयंती है। उनका जन्म साल 1630 में हुआ था। इतिहास में उन्हें एक ऐसे योद्धा के तौर पर याद किया जाता है, जिसने मुगलों की नाक में दम कर दिया था। मुगल बादशाह औरंगजेब, शिवाजी के युद्ध कौशल और रणनीति की वजह से ही दिल्ली में नहीं रह पाया और अपने जीवन के आखिरी 25 सालों तक दक्षिण में रहने को मजबूर हो गया। मराठों से लड़ते-लड़ते औरंगजेब के बाल सफेद हो गए लेकिन मराठों का जोश कम नहीं हुआ।

मुगल साम्राज्य जब अपनी मजबूत स्थिति में था और औरंगजेब उस पर अपना शासन कर रहा था, उसी समय जीजा बाई और शहाजी राजे भोसले के बेटे शिवाजी राजे भोसले ने मुगल साम्राज्य के विरुद्ध ऐसी जंग छेड़ी, जो औरंगजेब के अंत तक खत्म नहीं हुई। मुगल खत्म हो गए लेकिन मराठों के उफनते जोश को कम नहीं कर सके। शिवाजी ने अपने जीवनकाल में एक ऐसी चिंगारी को पैदा किया, जिसने मराठाओं के अंदर आग भड़का दी और वह मुगल साम्राज्य को नेस्तानाबूद करने के मकसद से ही जीने लगे।

छापामार युद्ध कला में माहिर

शिवाजी की सबसे बड़ी ताकत उनकी छापामार युद्ध की कला थी। अपनी इसी युद्ध कला के बलवूते उन्होंने मुगलों को कई बार मात दी और अपना वर्चस्व कायम किया। उन्होंने बीजापुर के चार पहाड़ी किलों पर कब्ज़ा कर मुगल साम्राज्य के विरुद्ध विद्रोह किया। उन्होंने अफजल खां को मौत के घाट उतारा और औरंगजेब के मामा शाइस्ता खां के घर में घुसकर उनकी कई पत्नियों और बेटों की हत्या कर दी। 

शाइस्ता खां वो शख्स था, जिसे औरंगज़ेब ने दक्षिण में अपना वायसराय नियुक्त किया था। वह पुणे के लाल महल में रहता था। शिवाजी के हमले के बाद औरंगजेब ने अपने मामा शाइस्ता खां का तबादला कर दिया और उन्हें बंगाल भेज दिया। 

औरंगजेब की कैद से भागे

एक बार शिवाजी और औरंगजेब की मुलाकात आगरा में होना तय हुआ। लेकिन दरबार में औरंगजेब ने शिवाजी के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया। जब शिवाजी ने इस बात का विरोध किया तो औरंगजेब ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। हालांकि बाद में शिवाजी और उनके बेटे संभाजी चकमा देकर औरंगजेब के कैद से मुक्त हो गए।

आखिर तक मुगल शासक की नाक में दम करते रहे

शिवाजी अपनी रणनीति से आखिर तक मुगल शासक औरंगजेब की नाक में दम करते रहे। हालात ये बन गए कि औरंगजेब को खुद दक्षिण जाना पड़ा। मुगल बादशाह को लगा कि कुछ सालों में वह मराठाओं पर विजय हासिल कर लेगा और विद्रोह को दबा देगा लेकिन ऐसा हो नहीं सका।

शिवाजी के निधन के बाद उनके बेटे संभाजी ने मोर्चा संभाला और मुगलों के दांत खट्टे कर दिए। औरंगजेब 25 सालों तक दक्षिण में रहकर मराठाओं से संघर्ष करता रहा लेकिन वापस दिल्ली नहीं जा सका। आखिर में हालात ये हो गए कि मराठाओं से लड़ते-लड़ते वह बीमार पड़ गया और उसे शरीर में कई परेशानियां हो गईं। साल 1707 में औरंगजेब की मौत हो गई। 

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